विषाणु एवं प्रोटोजोआ जनित रोग - परीक्षा उपयोगी नोट्स

विषाणु जनित रोग (Viral Diseases) [BSEB 2010, 2016, 2021]

सामान्य जुकाम (Common Cold):

रोगजनक (Pathogen) [BSEB 2009]: यह मानव में सबसे ज्यादा होने वाला संक्रामक रोग है, जो नासाविषाणुओं (Rhinovirus) के समूह द्वारा फैलता है।

प्रभावित अंग (Affected Organ): ये विषाणु नाक (Nose) और श्वसन पथ (Respiratory passage) को संक्रमित करते हैं, लेकिन यह संक्रमण फेफड़ों (Lungs) तक नहीं पहुँचता।

लक्षण (Symptoms): नासीय संकुलता (Nasal congestion) और स्राव, कंठ दाह (Sore throat), स्वररुक्षता (फटी आवाज), खाँसी, सिरदर्द, और थकावट, जो प्रायः 3-7 दिन तक रहते हैं।

संचरण (Transmission): संक्रमित व्यक्ति की खाँसी या छींकों से निकले बिंदुक (Droplets) जब स्वस्थ व्यक्ति द्वारा साँस के साथ अंदर जाते हैं, अथवा जब स्वस्थ व्यक्ति पेन, किताबों, प्यालों, दरवाज़े की मूठों, कंप्यूटर कीबोर्ड या माउस जैसी संदूषित वस्तुओं के संपर्क में आता है।

विषाणु की संरचना (Virus Structure) [BSEB 2009]: विषाणु मुख्य रूप से प्रोटीन (Protein) आवरण (Capsid) तथा न्यूक्लिक अम्ल (Nucleic Acid - DNA या RNA) से बने होते हैं।

प्रोटोजोआ जनित रोग (Protozoan Diseases)

1. मलेरिया (Malaria):

रोगजनक (Pathogen) [BSEB 2017, 2020, 2025, 2026]: यह अत्यंत घातक रोग प्लैनज्मोडियम (Plasmodium) नामक एक सूक्ष्म प्रोटोजोआ द्वारा होता है।

प्रजातियाँ (Species): मानव में मलेरिया P. vivax, P. malariae, और P. falciparum द्वारा फैलता है।

सर्वाधिक घातक रूप [BSEB 2024]: Plasmodium falciparum द्वारा होने वाला दुर्दम (Malignant) मलेरिया सबसे गंभीर होता है और यदि समय पर उपचार न मिले तो यह प्राणघातक (Fatal) सिद्ध हो सकता है।

संचरण वाहक (Vector) [BSEB 2017]: इस रोग का संचारण मादा ऐनोफेलीज मच्छर (Female Anopheles mosquito) के काटने से होता है।

प्लैनज्मोडियम का जटिल जीवन चक्र (Life Cycle of Plasmodium): [BSEB 2016, 2018]

संक्रामक अवस्था (Infective Stage) [BSEB 2020]: जब संक्रमित मादा ऐनोफेलीज मच्छर मानव को काटती है, तो प्लैज्मोडियम जीवाणुज (Sporozoites) के रूप में मानव के रक्त में प्रवेश कर जाते हैं।

यकृत चक्र (Hepatic Schizogony / Liver Stage): प्रारंभ में परजीवी यकृत (Liver) कोशिकाओं में जाते हैं और वहाँ अलैंगिक रूप से (Asexually) अपनी संख्या बढ़ाते हैं। इसके बाद वे यकृत कोशिकाओं को फोड़कर रक्त में वापस आ जाते हैं।

रक्त चक्र (Erythrocytic Schizogony): परजीवी लाल रुधिर कणिकाओं (RBCs) पर आक्रमण करते हैं, उनके भीतर अलैंगिक जनन करते हैं, और अंततः उन्हें फाड़ देते हैं।

हीमोजोइन का निर्माण और ज्वर (Hemozoin Biocrystallization): लाल रक्त कणिकाओं के फटने के साथ ही एक अत्यंत विषैला (Toxic) पदार्थ निकलता है जिसे हीमोजोइन (Hemozoin) कहते हैं। (आधुनिक अनुसंधानों के अनुसार, परजीवी अपनी अम्लीय पाचक रसधानी / Acidic Digestive Vacuole के भीतर मानव हीमोग्लोबिन को तोड़ता है। इस प्रक्रिया में विषैला मुक्त 'हीम' / Free Heme निकलता है। परजीवी अपनी रक्षा के लिए इस 'हीम' को अघुलनशील क्रिस्टल में बदल देता है, जिसे हीमोजोइन कहते हैं। क्लोरोक्वीन / Chloroquine जैसी दवाइयाँ इसी क्रिस्टलीकरण को रोकती हैं)। यही हीमोजोइन मनुष्य में ठिठुरन (Chills) और प्रत्येक तीन से चार दिन के अंतराल पर आने वाले उच्च आवर्ती ज्वर (High recurring fever) के लिए उत्तरदायी है।

लैंगिक अवस्था (Sexual Stage / Gametocytogenesis): लाल रुधिर कोशिकाओं में ही परजीवी का लैंगिक रूप—नर और मादा युग्मकजनक (Gametocytes)—विकसित होता है।

मच्छर चक्र (Sporogony): जब मादा ऐनोफेलीज मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति का रक्त पीती है, तो ये युग्मकजनक उसके आमाशय (Stomach / Midgut) में पहुँच जाते हैं। मच्छर के आमाशय में ही इनका निषेचन (Fertilization) और आगे का परिवर्धन होता है।

अंततः, ये परजीवी बहुसंख्यात्मक रूप से बढ़कर पुनः जीवाणुज (Sporozoites) बन जाते हैं, जो मच्छर की लार ग्रंथियों (Salivary glands) में जमा हो जाते हैं और चक्र पुनः आरंभ होता है।

2. अमीबता / अमीबी अतिसार (Amoebiasis / Amoebic Dysentery):

रोगजनक (Pathogen) [BSEB 2019, 2021, 2022]: यह रोग मानव की वृहत् आंत्र (Large intestine) में पाए जाने वाले एंटअमीबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba histolytica) नामक प्रोटोजोअन परजीवी से होता है।

लक्षण (Symptoms): कोष्ठबद्धता (कब्ज / Constipation), उदरीय पीड़ा (Abdominal pain), ऐंठन (Cramps), और अत्यधिक श्लेषमल (Mucus) तथा रक्त के थक्के (Blood clots) वाला मल।

संचरण वाहक (Mechanical Vector): घरेलू मक्खियाँ (Houseflies) इस रोग की शारीरिक वाहक हैं। वे परजीवी को संक्रमित व्यक्ति के मल से लेकर खाद्य पदार्थों और पेयजल तक पहुँचाकर उन्हें संदूषित कर देती हैं (Fecal-oral transmission)।